स ईक्षांचक्रे।
कस्मिन्नहमुत्क्रान्त उत्क्रान्तो भविष्यामि कस्मिन् वा प्रतिष्ठिते प्रतिष्टस्यामीति ॥
उसने 'स्वयं' के विषय में विचार किया। वह कौन हो सकता है जिसके उत्क्रमण करने (निकल जाने) से मैं इस शरीर से निकल (उत्कान्त हो) जाऊँगा तथा जिसके स्थित रहने से मैं स्थित रहूँगा?
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