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प्रश्न • अध्याय 5 • श्लोक 7
ऋग्भिरेतं यजुर्भिरन्तरिक्षं सामभिर्यत्तत्कवयो वेदयन्ते। तमोंकारेणैवायतनेनान्वेति विद्वान्‌ यत्तच्छान्तमजरममृतमभयं परं चेति ॥
ऋग्वेद के द्वारा इहलोक (पृथ्वी) को प्राप्त करते हैं, अन्तरिक्ष को यजुर्वेद के द्वारा, किन्तु सामवेद के द्वारा 'उसे' जिसे ऋषि ही जानते हैं। विद्वान् पुरुष 'ओंकार' में स्थित होकर ही उस लोक को प्राप्त करते हैं, वे उस 'परमा शान्ति' को भी प्राप्त करते हैं जहाँ जरा का प्रभाव है तथा 'अमृतत्व' के द्वारा भय से मुक्ति मिल जाती है।
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