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प्रश्न • अध्याय 5 • श्लोक 2
तस्मै स होवाच एतद् वै सत्यकाम परं चापरं च ब्रह्म यदोङ्कारः। तस्माद् विद्वानेतेनैवायतनेनैकतरमन्वेति ॥
ऋषि पिप्पलाद ने उसे उत्तर दिया - ''हे सत्यकाम, यह 'ओंकार', यह 'अक्षर शब्द', 'परब्रह्म' भी है 'अवर-ब्रह्म' भी। अतएव विद्वान् पुरुष इस 'शब्द' में अपना निवासस्थान बनाकर, इनमें से किसी एक को प्राप्त कर लेता है।"
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