अथ हैनं सैब्यः सत्यकामः पप्रच्छ।
स यो ह वै तद् वगवन्मनुष्येषु प्रायणान्तमोङ्कारमभिध्यायीत कतमं वाव स तेन लोकं जयतीति ॥
तब शैब्य सत्यकाम ने पूछा—
“हे भगवन्! यदि कोई मनुष्य अपने जीवन के अंतिम समय तक ओंकार का ध्यान करता है, तो वह कौन-सा लोक प्राप्त करता है?”
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