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प्रश्न • अध्याय 4 • श्लोक 1
अथ हैनं सौर्यायणि गार्ग्यः पप्रच्छ। भगवन्नेतस्मिन्‌ पुरुषे कानि स्वपन्ति कान्यस्मिञ्जाग्रति कतर एष देवः स्वप्नान्‌ पश्यति कस्यैतत्सुखं भवति कस्मिन्नु सर्वे सम्प्रतिष्ठिता भवन्तीति ॥
तब सौर्यायणी गार्ग्य ने पूछा— “हे भगवन्! इस पुरुष में कौन-कौन स्वप्नावस्था में रहते हैं, कौन जाग्रत रहते हैं, कौन-सा देव स्वप्नों को देखता है, किसमें सुख का अनुभव होता है, और अंततः सब कुछ किसमें प्रतिष्ठित रहता है?”
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