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प्रश्न • अध्याय 3 • श्लोक 9
तेजो ह वाव उदानस्तस्मादुपशान्ततेजाः पुनर्भवमिन्द्रियैर्मनसि सम्पद्यमानैः ॥
उदान वास्तव में तेजस् (ऊर्ध्वगामी सूक्ष्म ऊर्जा) है। इसलिए जब इसका तेज शान्त हो जाता है, तब इन्द्रियाँ और मन के लय होने पर जीव पुनः पुनर्जन्म को प्राप्त करता है।
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