तेज' आदि-ऊर्जा, ही है उदान; अतः जब मनुष्य में तेज तथा ऊष्मा क्षीण होने लगती हैं, तब उसकी इन्द्रियां मन में सिमट जाती हैं तथा अवस्था में वह पुनर्जन्म के लिए प्रयाण कर जाता है।
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