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प्रश्न • अध्याय 3 • श्लोक 7
अथैकयोर्ध्व उदानः पुण्येन पुण्यं लोकं नयति। पापेन पापमुभाभ्यामेव मनुष्यलोकम्‌ ॥
अब इनमें से एक नाड़ी के माध्यम से उदान वायु ऊपर की ओर जाता है। वह पुण्य के द्वारा जीव को पुण्यलोक में ले जाता है, पाप के द्वारा पापकर्मफल में, और दोनों के मिश्रण से उसे पुनः मनुष्यलोक में ले आता है।
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