मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रश्न • अध्याय 3 • श्लोक 4
यथा सम्रादेवाधिकृतान्‌ विनियुङ्क्ते। एतन्‌ ग्रामानोतान्‌ ग्रामानधितिष्ठस्वेत्येवमेवैष प्राण इतरान्‌ प्राणान्‌ पृथक्‌पृथगेव सन्निधत्ते ॥
जिस प्रकार कोई सम्राट् अपने अधिकारियों को नियुक्त करता है तथा किसी एक को आदेश देता है - 'मेरे लिए इन ग्रामों पर तुम शासन करो', तथा किसी अन्य को आदेश देता है - 'इन दूसरे ग्रामों पर मेरे लिए तुम शासन करो', इसी प्रकार यह वायु, यह 'प्राण' अन्य प्राणों को उनके पृथक्-पृथक् क्षेत्रों में नियुक्त करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रश्न के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रश्न के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें