जिस प्रकार कोई सम्राट् अपने अधिकारियों को नियुक्त करता है तथा किसी एक को आदेश देता है - 'मेरे लिए इन ग्रामों पर तुम शासन करो', तथा किसी अन्य को आदेश देता है - 'इन दूसरे ग्रामों पर मेरे लिए तुम शासन करो', इसी प्रकार यह वायु, यह 'प्राण' अन्य प्राणों को उनके पृथक्-पृथक् क्षेत्रों में नियुक्त करता है।
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