तस्मै स होवाचातिप्रश्चान् पृच्छसि ब्रह्मिष्ठोऽसीति तस्मात्तेऽहं ब्रवीमि ॥
ऋषि पिप्पलाद ने उसे उत्तर दिया - "तुम बहुत सारे एवं दुरूह प्रश्न पूछ रहे हो; परन्तु, क्योंकि तुम अतिपुण्यात्मा (ब्रह्मिष्ठ) हो, इसलिए मैं तुम्हें बताऊँगा।"
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रश्न के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।