प्राण' की उत्पत्ति, उसका आगमन, उसकी स्थिति, पञ्चविध क्षेत्रों में उसका विभुत्व (प्रभुत्व) इसी प्रकार 'आत्मा' से उसका सम्बन्ध, सब जानकर मनुष्य अमृतत्व का पान करता है।
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