य एवं विद्वान् प्राणं वेद।
न हास्य प्रजा हीयतेऽमृतो भवति तदेषः श्लोकः ॥
जो विद्वान् 'प्राण' के सम्बन्ध में इस प्रकार जानता है, उसका वंश क्षीण (व्यर्थ) नहीं होता, वह अमर हो जाता है। जिसके लिए यह श्लोक (श्रुतिवचन) है।
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