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प्रश्न • अध्याय 3 • श्लोक 1
अथ हैनं कौशल्यश्चाश्वलायनः पप्रच्छ। भगवन्‌ कुत एष प्राणो जायते कथमायात्यस्मिञ्शरीर आत्मानं वा प्रविभज्य कथं प्रतिष्ठते केनोत्क्रमते कथं बह्यमभिधते कथमध्यात्ममिति ॥
तत्पश्चात् अश्वलपुत्र कौशलन ने उनसे पूछा - भगवन्, यह 'प्राण' कहीं से उत्पन्न होता है? यह इस शरीर में कैसे आता है अथवा स्वयं को विभाजित करके कैसे स्थित होता है? किसके द्वारा उत्क्रमण (प्रयाण) कर जाता है, अथवा किस प्रकार बाह्य विषय एवं आन्तरिक अध्यात्म को धारण करता है?
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