अथ हैनं कौशल्यश्चाश्वलायनः पप्रच्छ।
भगवन् कुत एष प्राणो जायते कथमायात्यस्मिञ्शरीर आत्मानं वा प्रविभज्य कथं प्रतिष्ठते केनोत्क्रमते कथं बह्यमभिधते कथमध्यात्ममिति ॥
तब कौशल्य अश्वलायन ने पूछा—
“हे भगवन्! यह प्राण कहाँ से उत्पन्न होता है? यह इस शरीर में कैसे प्रवेश करता है? यह आत्मा को विभाजित कर किस प्रकार शरीर में स्थित होता है? यह कैसे शरीर से निकलता है? और यह बाह्य जगत् तथा आध्यात्मिक स्वरूप में कैसे प्रवृत्त होता है?”
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