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प्रश्न • अध्याय 2 • श्लोक 5
एषोऽग्निस्तपत्येष सूर्य एष पर्जन्यो मघवानेष वायुः। एष पृथिवी रयिर्देवः सदसच्चामृतं च यत्‌ ॥
देखो यही वह है जो 'अग्नि' है तथा यही 'सूर्य' है जो तपता है यही 'वर्षा' है तथा यही इन्द्र है यही 'पृथ्वी' है यही 'वायु' है यही 'रवि' तथा 'देव है 'सत्' तथा 'असत्' एवं 'अमृतत्वं' यही है।
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