एषोऽग्निस्तपत्येष सूर्य एष पर्जन्यो मघवानेष वायुः।
एष पृथिवी रयिर्देवः सदसच्चामृतं च यत् ॥
वह प्राण ही अग्नि रूप में तपता है, वही सूर्य है, वही पर्जन्य(वर्षा देने वाला) है, वही इन्द्र(मघवा) है, और वही वायु है।
वही पृथ्वी है, वही रयि(स्थूल पदार्थ/भौतिक सत्ता) है, और वही देव, सत्, असत् तथा अमृत भी है।
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