तान् वरिष्ठः प्राण उवाच।
मा मोहमापद्यथ अहमेवैतत्पञ्चधात्मानं प्रविभज्यैतद्बाणमवष्टभ्य विधारयामीति तेऽश्रद्दधाना बभूवुः ॥
तब प्राण ने उन सभी से कहा—
“तुम भ्रम में मत पड़ो। मैं ही अपने को पाँच भागों में विभाजित करके इस शरीररूपी बाण को धारण करता हूँ।”
किन्तु वे देवता इस बात पर विश्वास नहीं कर पाए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रश्न के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।