प्राणस्येदं वशे सर्वं त्रिदिवे यत् प्रतिष्ठितम्।
मातेव पुत्रान् रक्षस्व श्रीश्च प्रज्ञां च विधेहि न इति ॥
इस त्रिदिव(तीनों लोक) में जो कुछ भी प्रतिष्ठित है, वह सब प्राण के ही वश में है।
हे प्राण! तू हमें माता की तरह पुत्रों का संरक्षण कर, और हमें श्री(समृद्धि) तथा प्रज्ञा(बुद्धि) प्रदान कर।
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