मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रश्न • अध्याय 2 • श्लोक 13
प्राणस्येदं वशे सर्वं त्रिदिवे यत्‌ प्रतिष्ठितम्‌। मातेव पुत्रान्‌ रक्षस्व श्रीश्च प्रज्ञां च विधेहि न इति ॥
इस त्रिदिव (तीनों लोक) में जो कुछ भी प्रतिष्ठित है, वह सब प्राण के ही वश में है। हे प्राण! तू हमें माता की तरह पुत्रों का संरक्षण कर, और हमें श्री (समृद्धि) तथा प्रज्ञा (बुद्धि) प्रदान कर।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रश्न के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रश्न के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें