या ते तनूर्वाचि प्रतिष्ठिता या श्रोत्रे या च चक्षुषि।
या च मनसि सन्तता शिवां तां कुरू मोत्क्रमीः ॥
आपका जो देह वाणी में प्रतिष्ठित है, जो श्रोत्र एवं चक्षु में प्रतिष्ठित है और जो मन में विस्तीर्ण है उसे मंगलमय (शिव) बना दीजिये। हे प्राण! आप हमारे बीच से बाहर निकल कर मत जाइये।
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