हे प्राण! तू व्रात्य(सीमाओं से परे), एकर्षि(एकमात्र गतिदाता/द्रष्टा) और समस्त जगत् का सत्पति(सच्चा अधिपति) है।
हम तेरे द्वारा प्राप्त अन्न के दाता हैं, और तू हमारा पिता है, हे मातरिश्वा(वायु/प्राणस्वरूप)!
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