यह सूर्यविश्व के समस्त रूपों वाला, हरितवर्ण(ऊर्जा-धारी/जीवनदायी), जातवेदस(सर्वज्ञ), परायण(परम आश्रय) और एकमात्र तेजस्वी ज्योति है जो तपता हुआ प्रकाशित रहता है।
यह सहस्रों किरणों वाला, अनेक प्रकार से प्रवृत्त होकर प्रजाओं का प्राण बनकर उदय होता है—यही सूर्य है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रश्न के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।