स एष वैश्वानरो विश्वरुपः प्राणोऽग्निरुदयते।
तदेतद् ऋचाऽभ्युक्तम् ॥
वह सूर्यरूप वैश्वानर है, जो समस्त रूपों वाला है, और वही प्राणस्वरूप अग्नि होकर उदित होता है। इसके विषय में यह ऋचा(वेद-मंत्र) कही गई है।
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