सूर्य (आदित्य) ही प्राण है, और चन्द्रमा रयि (पदार्थ) है।
यह सम्पूर्ण जगत—
चाहे साकार (दिखने वाला) हो या निराकार (अदृश्य)—सब रयि (पदार्थ) ही है। इसलिए जो कुछ भी रूप में दिखाई देता है, वह रयि ही है।
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