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प्रश्न • अध्याय 1 • श्लोक 5
आदित्यो ह वै प्राणो रयिरेव चन्द्रमाः रयिर्वा एतत्‌ सर्वं यन्मूर्तं चामूर्तं च तस्मान्मूर्तिरेव रयिः ॥
सूर्य (आदित्य) ही प्राण है, और चन्द्रमा रयि (पदार्थ) है। यह सम्पूर्ण जगत— चाहे साकार (दिखने वाला) हो या निराकार (अदृश्य)—सब रयि (पदार्थ) ही है। इसलिए जो कुछ भी रूप में दिखाई देता है, वह रयि ही है।
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