उन शिष्यों से ऋषि पिप्पलाद ने कहा—
“तुम सभी पुनः एक वर्ष तकतप(संयम), ब्रह्मचर्य और श्रद्धा के साथ यहाँ निवास करो। उसके बाद तुम अपनी-अपनी इच्छानुसार प्रश्न पूछना। यदि हम उन्हें जान पाएँगे, तो हम तुम सबको सम्पूर्ण उत्तर देंगे।”
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