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प्रश्न • अध्याय 1 • श्लोक 15
तद्ये ह वै तत्प्रजापतिव्रतं चरन्ति ते मिथुनमुत्पादयन्ते। तेषामेवैष ब्रह्मलोको येषां तपो ब्रह्मचर्यं येषु सत्यं प्रतिष्ठितम्‌ ॥
जो लोग प्रजापति के इस नियम (व्रत) का पालन करते हैं, वे ही संतान उत्पन्न करते हैं (सृष्टि को आगे बढ़ाते हैं)। लेकिन उनमें से केवल वे ही ब्रह्मलोक को प्राप्त होते हैं, जिनके जीवन में—तप (अनुशासन), ब्रह्मचर्य (संयम) और सत्य (सच्चाई) स्थापित होते हैं।
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