जो लोग प्रजापति के इस नियम (व्रत) का पालन करते हैं, वे ही संतान उत्पन्न करते हैं (सृष्टि को आगे बढ़ाते हैं)।
लेकिन उनमें से केवल वे ही ब्रह्मलोक को प्राप्त होते हैं, जिनके जीवन में—तप (अनुशासन), ब्रह्मचर्य (संयम) और सत्य (सच्चाई) स्थापित होते हैं।
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