मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रश्न • अध्याय 1 • श्लोक 13
अहोरात्रो वै प्रजापतिस्तस्याहरेव प्राणो रात्रिरेव रयिः। प्राणं वा एते प्रस्कन्दन्ति ये दिवा रत्या संयुज्यन्ते ब्रह्मचर्यमेव तद्यद्रात्रौ रत्या संयुज्यन्ते ॥
दिन और रात मिलकर ही प्रजापति (सृष्टि का स्वरूप) हैं। इसमें दिन प्राण (जीवन शक्ति) है, और रात रयि (पदार्थ/विश्राम) है। जो लोग दिन में इंद्रिय-सुख (रति) में लिप्त होते हैं, वे अपनी जीवन शक्ति (प्राण) को नष्ट करते हैं। और जो लोग रात में संयमपूर्वक (नियमित रूप से) इसका पालन करते हैं, वह ब्रह्मचर्य के अनुकूल माना गया है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रश्न के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रश्न के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें