मास (महीना) ही प्रजापति (सृष्टि का रूप) है।
उसमें कृष्ण पक्ष (अंधकार पक्ष) रयि (पदार्थ) है, और शुक्ल पक्ष (प्रकाश पक्ष) प्राण (जीवन शक्ति) है।
इसलिए ऋषि लोग अपने यज्ञ और शुभ कर्म शुक्ल पक्ष में करते हैं, और अन्य लोग उन्हें दूसरे (कृष्ण पक्ष) में करते हैं।
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