उस ॐकार रूप ब्रह्म में तीन देवता, (ब्रह्मा, विष्णु, महेश), तीन लोक (भूः, भुवः, स्वः), तीन वेद(ऋक्, यजुष, साम), तीन अग्नियाँ(गार्हपत्य, दक्षिणाग्नि, आहवनीय), तीन पूर्ण मात्रा और एक अर्धमात्रा(अ, उ, म् एवं अनुस्वार) सन्निहित हैं।
वहीं उसका साक्षात् कल्याणकारी शिव स्वरूप है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रणव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।