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प्रणव • अध्याय 1 • श्लोक 3
तत्र देवास्त्रयः प्रोक्ता लोका वेदास्त्रयोऽग्नयः।। तिस्रो मात्रार्धमात्रा च प्रत्यक्षस्य शिवस्य तत् ॥
उस ॐकार रूप ब्रह्म में तीन देवता, (ब्रह्मा, विष्णु, महेश), तीन लोक (भूः, भुवः, स्वः), तीन वेद (ऋक्, यजुष, साम), तीन अग्नियाँ (गार्हपत्य, दक्षिणाग्नि, आहवनीय), तीन पूर्ण मात्रा और एक अर्धमात्रा (अ, उ, म् एवं अनुस्वार) सन्निहित हैं। वहीं उसका साक्षात् कल्याणकारी शिव स्वरूप है।
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