मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रणव • अध्याय 1 • श्लोक 13
यस्मिन् स लीयते शब्दस्तत्परं ब्रह्म गीयते। सोऽमृतत्वाय कल्पते सोऽमृतत्वाय कल्पते इति॥
जो साधक (उक्त) ओङ्कार स्वरूप शब्द नाद में लीन हो जाता है, वह ब्रह्मस्वरूप ही कहा जाता है। वही अमृतत्व को प्राप्त हो जाता है, यह सुनिश्चित है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रणव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रणव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें