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प्रणव • अध्याय 1 • श्लोक 10
पद्मसूत्रनिभा सूक्ष्मा शिखाभा दृश्यते परा। नासादिसूर्यसंकाशा सूर्य हित्वा तथापरम्॥
दूसरी कमल सूत्र (कमल नाल) के सदृश सूक्ष्म शिखा की कान्ति (मस्तक प्रदेश में) दृष्टिगोचर होती है, वह नासारन्ध्र से सूर्यवत् तेज को धारण कर सूर्यमण्डल का भेदन कर वहाँ स्थित है।
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