नन्वर्कप्रतिबिम्बः सलिलादिषुयः स चावभासयति ।
किमितरपदार्थनिवहं प्रतिबिम्बोऽप्यात्मनस्तद्वत् ॥
शंका-जल में पड़ा हुआ सूर्य का प्रतिविम्ब तो अन्यान्य पदार्थों को प्रकाशित करता है, क्या आत्म-प्रतिविम्ब भी उसी के समान दूसरे पदार्थों को प्रकाशित किया करता है!
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