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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 8 • श्लोक 9
एवमदृश्या माया तत्कार्यं जगदिदं दृश्यम् । माया तावदियं स्याद्या स्वविनाशेन हर्षदा भवति ॥
इसी प्रकार माया तो अदृश्य है किन्तु उसका कार्य यह जगत् दृश्यरूप है, और माया तो यही है कि वह अपने नाश से ही आनन्द देने वाली होती है।
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