तब यह आकाश (आकाश के समान शून्यप्राय पुरुष) सर्वदा स्त्री के द्वारा ही पूर्ण होता है। उस स्त्री ने ईक्षण किया और तब उससे मनुष्यों की उत्पत्ति हुई।
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