अज्ञानेन तथात्मा शुद्धोऽपि च्छाद्यते सुचिरम् ।
न परंतु लोकसिद्धा प्राणिषु तच्चेतनाशक्तिः ॥
उसी प्रकार शुद्ध आत्मा भी चिरकाल तक अज्ञान से आवृत तो रहता है, परन्तु प्राणियों में जो लोक-प्रसिद्ध चेतनाशक्ति है उसका आच्छादन नहीं होता।
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