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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 8 • श्लोक 14
दिनकरकिरणोत्पन्नैर्मेघैराच्छाद्यते यथा सूर्यः । न खलु दिनस्य दिनत्वं तैर्विकृतैः सान्द्रसंघातैः ॥
समाधान - जिस प्रकार सूर्य अपनी ही किरणों से उत्पन्न हुए मेघों से ढक जाता है किन्तु उस मेघ-समूह से दिन के दिनत्व में कोई विकार नहीं होता,
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