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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 8 • श्लोक 13
ननु कथमावरणं स्यादज्ञानं ब्रह्मणो विशुद्धस्य । सूर्यस्येव तमिस्रं रात्रिभवं स्वप्रकाशस्य ॥
शंका-अज्ञान विशुद्ध ब्रह्म का आवरण किस प्रकार कर सकता है? रात्रि का अन्धकार भी क्या स्वयंप्रकाश सूर्य को ढक सकता है?
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