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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 8 • श्लोक 12
घटमठकुड्यैरावृतमाकाशं तत्तदाह्वयं भवति । तद्वदविद्यावृतमिह चैतन्यं जीव इत्युक्तः ॥
घट, मठ और भित्ति आदि उपाधियों से आवृत आकाश भो घटाकाश, मठाकाश आदि तदनुकूल नाम वाला हो जाता है, उसी प्रकार अविद्या से आवृत शुद्ध, चेतन ही जीव कहलाता है।
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