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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 8 • श्लोक 1
चिन्मत्रः परमात्मा ह्यपश्यदात्मानमात्मतया । अभवत्सोऽहंनामा तस्मादासीद्भिदो मूलम् ॥
चिन्मात्र परमात्मा ने ही प्रथम अपने आपको आपरूप से देखा। तब उसका नाम 'अहंकार' हुआ। उसी से भेद की नींव पड़ी।
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