मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रबोधसुधाकर • अध्याय 7 • श्लोक 9
तेजोंशेन पृथक्पदार्थनिवहज्ञानं हि यज्जायते तद्रन्ध्रैः कलशेन वा किमु मृदो भाण्डेन तैलेन वा । किं सूत्रेण न चैतदस्ति रुचिरं प्रत्यक्षबाधादतो दीपज्योतिरिहैकमेव शरणं देहे तथात्मा स्थितः ॥
अब उस कलश के छिद्रों से बाहर निकलने वाले तेज के अंशों से जो उन विविध पदार्थों का पृथक् पृथक् ज्ञान होता है वह किससे होता है? छिद्रों से, कलश से, मृत्तिका से, पात्र से, तैल से या बत्ती से? प्रत्यक्ष-विरुद्ध होने के कारण इनमें से किसी से भी कहना ठीक न होगा; अतः इन पदार्थों के ज्ञान में तो एकमात्र दीपक का प्रकाश ही शरण (कारण) है, इसी प्रकार शरीर में भी प्रत्येक ज्ञान का आधार आत्मा ही है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रबोधसुधाकर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रबोधसुधाकर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें