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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 7 • श्लोक 8
गाढध्वान्तगृहान्ततः क्षितितले दीपं निधायोज्ज्वलं पञ्चच्छिद्रमधोमुखं हि कलशं तस्योपरि स्थापयेत् । तद्बाह्ये परितोऽनुरन्ध्रममलां वीणां च कस्तूरिकां सद्रत्नं व्यजनं न्यसेच्च कलशच्छिद्राध्वनिर्गच्छताम् ॥
एक गाढ़ अन्धकारमय घर के भीतर पृथ्वी पर एक स्फुट-प्रकाशमय दीपक रखे, उसके ऊपर एक पाँच छिद्रों वाला घड़ा नीचे को मुख करके स्थापित करे। उसके बाहर प्रत्येक छिद्र के सामने क्रमशः सुन्दर वीणा, कस्तुरी, रत्न और पल्ला रखे।
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