मृतदेहेन्द्रियवर्गो यतो न जानाति दाहजं दुःखम् ।
प्राणश्चेन्निद्रायां तस्करबाधां स किं वेत्ति ॥
क्योंकि मरे हुए प्राणी के देह और इन्द्रियाँ दाह-जन्य दुःख का अनुभव नहीं करते। यदि कहा जाय कि प्राण ही इनका अनुभव करता है, तो सो जाने पर क्या उसे चोर आदि से होने वाली हानि का ज्ञान होता है?
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