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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 7 • श्लोक 3
त्रेधा प्रतीतिरुक्ता शास्त्राद्गुरुतस्तथात्मनस्तत्र । शास्त्रप्रतीतिरादौ यद्वन्मधुरो गुडोऽस्तीति ॥
आत्मा की प्रतीति शास्त्र, गुरु और अपना अन्तःकरण इन तीन साधनों से होती बतलायी जाती है। उनमें प्रथम प्रतीति शास्त्र द्वारा होती है, जैसे पहले लोगों से सुनकर यह ज्ञान होता है कि 'गुड़ मीठा होता है'।
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