आत्मा की प्रतीति शास्त्र, गुरु और अपना अन्तःकरण इन तीन साधनों से होती बतलायी जाती है। उनमें प्रथम प्रतीति शास्त्र द्वारा होती है, जैसे पहले लोगों से सुनकर यह ज्ञान होता है कि 'गुड़ मीठा होता है'।
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