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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 5 • श्लोक 8
इह वा पूर्वभवे वा स्वकर्मणैवार्जितं फलं यद्यत् । शुभमशुभं वा तत्तद्भोगोऽप्यप्रार्थितो भवति ॥
इस जन्म के अथवा पूर्वजन्म के कर्मो से उपार्जित जैसे-जैसे शुभ अथवा अशुभ फल होने होते हैं, उनके भोग भी बिना माँगे उपस्थित हो जाते हैं।
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