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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 5 • श्लोक 6
नगनगरदुर्गदुर्गमसरितः परितः परिभ्रमच्चेतः । यदि नो लभते विषयं विषयन्त्रितमिव खिन्नमायाति ॥
अपने अभीष्ट विषय की खोज में पर्वत, नगर, दुर्ग और दुर्गम नदियों में सब ओर भटकता हुआ चित्त यदि उस विषय को नहीं पाता तो विवश-सा होकर खिन्न हो जाता है।
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