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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 5 • श्लोक 4
तद्वद्विषयोद्रिक्तं तमःप्रधानं मनः कलुषम् । तस्मिन्विरागशुष्के शनकैराविर्भवेत्सत्त्वम् ॥
उसी प्रकार विषय-वासनाओं से भरा हुआ चित्त तमोगुणी और पापमय होता है, वैराग्य द्वारा उसी के सूख जाने पर उसमें धीरे-धीरे सत्त्वगुण का आविर्भाव हो जाता है।
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