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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 5 • श्लोक 13
प्राणस्पन्दनिरोधात्सत्सङ्गाद्वासनात्यागात् । हरिचरणभक्तियोगान्मनः स्ववेगं जहाति शनैः ॥
प्राण-स्पन्दन के रोक देने से, सत्संग से, वासनाओं के त्याग से और भगवत्चरणारविन्दों की भक्ति से मन धीरे-धीरे अपने वेग को छोड़ देता है।
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