उसी प्रकार समस्त इन्द्रियों के रोक देने पर सैकड़ों उपायों से भी बाहर निकलना असम्भव जानकर चित्त शान्त होकर स्थिर हो जाता है और फिर धूम-धाम नहीं करता।
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