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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 5 • श्लोक 10
निद्रावसरे यत्सुखमेतत्किं विषयजं यस्मात् । न हि चेन्द्रियप्रदेशावस्थानं चेतसो निद्रा ॥
निद्रा के समय जो सुख होता है क्या वह विषयजन्य होता है? (कदापि नहीं) क्योंकि चित्त का इन्द्रिय-गोलकों में न रहना ही तो निद्रा है।
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