पुरुष परस्त्री को कामवश देखता है और उसकी प्राप्ति की कामना भी करता है। यद्यपि यह जानता है कि उसका मिलना सर्वथा असम्भव है तथापि (उसकी कामना करके) वह व्यर्थ घोर पाप का भागी बन जाता है।
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