(विवेकहीन हो जाने के कारण) यह भद्र पुरुषों की निन्दा करता है और दुष्ट की स्तुति तथा कभी तो किसी से रोषपूर्वक द्वेष करने लगता हैं और कभी अपनी प्रशंसा करने लगता है।
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