(अतः इन दो पक्षो का निराकरण हो जाने से इस शब्द का तत्पर्य दसरे पक्ष (संसार) में ही है किन्तु इस) द्वितीय पक्ष में भी यह वेदवाक्य पुत्रहीन पुरुषों की पुत्रेष्टि आदि यज्ञों में प्रवृत्ति कराने के लिये ही है।
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