इस प्रकार रूपवती स्त्री का पति क्षण-क्षण में ईर्ष्या से क्षीण होता हुआ जरा भी चैन नहीं पाता; जेसे बहुत-से कौवों में पड़ी हुई बलि को एक कौवा नहीं पा सकता।
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