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प्रबोधसुधाकर • अध्याय 2 • श्लोक 22
राज्यान्तराभिगमनाद्रणभङ्गान्मन्त्रिभृत्यदोषाद्वा । विषशस्त्रगुप्तघातान्मग्नाश्चिन्तार्णवे भूपाः ॥
राजा लोग अन्य राजारओं के आक्रमण से, युद्ध में पराजय से, मन्त्री और सेवकादि के षड्यन्त्रों से तथा विष अथवा शस्त्रो के द्वारा गुप्तघात आदि से (शंकितचित्त रहकर) सदा ही चिन्तासागर में डूबे रहते हैं।
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